उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gham mein ek lutf-e-shadmani hai

ग़म में इक लुत्फ़-ए-शादमानी है

غم میں اک لطف شادمانی ہے

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़म में इक लुत्फ़-ए-शादमानी है
ठोकरों में भी कामरानी है

सिर्फ़ इक इश्क़ ग़ैर-फ़ानी है
वर्ना हर चीज़ आनी-जानी है

जो नहीं आश्ना मोहब्बत से
दिल पे उस बुत की हुक्मरानी है

मौत और ज़िंदगी में है ये फ़र्क़
इक हक़ीक़त है इक कहानी है

याद तेरी है ज़ीस्त का हासिल
ग़म तिरा वज्ह-ए-शादमानी है

चश्म-ए-पुर-नम ये मेरी ख़ामोशी
दिल के ज़ख़्मों की तर्जुमानी है

क्या बुरा जो किसी के काम आए
जान इक दिन तो ख़ैर जानी है

जाँ है अटकी लबों पर ऐ 'आसी'
चारासाज़ों की मेहरबानी है