उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghafil hun teri yaad se aisa to nahin hai

ग़ाफ़िल हूँ तिरी याद से ऐसा तो नहीं है

غافل ہوں تری یاد سے ایسا تو نہیں ہے

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi12 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़ाफ़िल हूँ तिरी याद से ऐसा तो नहीं है
हर-वक़्त मिरे दिल में तिरी याद मकीं है

दुनिया-ए-मोहब्बत बड़ी दिलकश है हसीं है
हर एक को रास आए ज़रूरी तो नहीं है

माना कि ज़माने का हर इक नक़्श हसीं है
इस पर भी ज़माने में कोई तुझ सा नहीं है

इक अर्ज़-ए-तमन्ना के सिवा हम ने किया क्या
किस बात पे वो शो'ला-बदन चीं-ब-जबीं है

क्या ख़ाक हो मेरे दिल-ए-बेताब का दरमाँ
जब तुझ पे तिरी चश्म-ए-तवज्जोह ही नहीं है

दिल में है मगर जज़्बा-ए-इख़्लास-ओ-मोहब्बत
वो ख़ुद ही खिंचे आएँगे ये मेरा यक़ीं है

क्या कहिए मोहब्बत में अजब हाल है अपना
नज़रें हैं कहीं और तो दिल और कहीं है

रह रह के खटकता है जो हर साँस में पैहम
सीने में कोई ख़ार है या क़ल्ब-ए-हज़ीं है

इक़रार-ए-वफ़ा कर भी चुकीं तेरी निगाहें
अफ़्सोस तिरे लब पे मगर फिर भी नहीं है

इस बुत का कोई अहद भी ईफ़ा नहीं होता
क्या इस का यक़ीं जिस का न ईमाँ है न दीं है

क्या तुरफ़ा-क़यामत है मिरी वज्ह-ए-तबाही
वो पूछते हैं और मुझे याद नहीं है

शर्मिंदा-ए-एहसाँ मैं नहीं राह-नुमा का
'आसी' मिरा रहबर तो मिरा अज़्म-ओ-यक़ीं है