उर्दू शायरी · ग़ज़ल

fikr-e-sud-o-ziyan mein rahta hun

फ़िक्र-ए-सूद-ओ-ज़ियाँ में रहता हूँ

فکر سود و زیاں میں رہتا ہوں

शायर: Hafeez Shahid9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़िक्र-ए-सूद-ओ-ज़ियाँ में रहता हूँ
मैं भी इस ख़ाक-दाँ में रहता हूँ

नीलगूँ आसमान के नीचे
ख़ेमा-ए-जिस्म-ओ-जाँ में रहता हूँ

मैं हूँ आज़ाद कब ज़माने में
क़ैद-ए-वहम-ओ-गुमाँ में रहता हूँ

मैं मोहब्बत की रौशनी बन कर
वक़्त की कहकशाँ में रहता हूँ

मैं बहारों के रंग में ढल कर
मंज़र-ए-बोस्ताँ में रहता हूँ

जाने क्या बात है कि मैं तन्हा
महफ़िल-ए-दोस्ताँ में रहता हूँ

अपने बूढे वजूद के अंदर
इक शिकस्ता मकाँ में रहता हूँ

फ़िक्र-ए-इतलाफ़-ए-ज़िंदगी कैसा
मैं अजल की अमाँ में रहता हूँ

मैं बगूलों के दरमियाँ 'शाहिद'
दश्त-ए-अस्र-ए-रवाँ में रहता हूँ