उर्दू शायरी · ग़ज़ल

fatiha bhi tere marqad pe paDhun ya na paDhun

फ़ातिहा भी तिरे मरक़द पे पढ़ूँ या न पढ़ूँ

فاتحہ بھی ترے مرقد پہ پڑھوں یا نہ پڑھوں (ردیف .. ا)

शायर: Zaheen Shah Taji4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़ातिहा भी तिरे मरक़द पे पढ़ूँ या न पढ़ूँ
तुझ को मुर्दा कहूँ या ज़िंदा-ए-जावेद कहूँ

मुत्तफ़िक़ 'अक़्ल से पाता हूँ मैं अहकाम-ए-जुनूँ
तू मिरी जान मिरी रूह मिरा सब्र-ओ-सुकूँ

किस तरह मैं तुझे मुर्दा कहूँ मुर्दा समझूँ
तुझ से ज़िंदा हूँ तिरे साथ ही मैं ज़िंदा हूँ

न हुआ तुझ से जुदा कोई तसव्वुर अपना
तुझे ऐ दोस्त कहूँ क्या मैं तहय्युर अपना