उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek mehman ka hijr tari hai

एक मेहमाँ का हिज्र तारी है

ایک مہماں کا ہجر طاری ہے

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक मेहमाँ का हिज्र तारी है
मेज़बानी की मश्क़ जारी है

सिर्फ़ हल्की सी बे-क़रारी है
आज की रात दिल पे भारी है

कोई पंछी कोई शिकारी है
ज़िंदा रहने की जंग जारी है

बस तिरे ग़म की ग़म-गुसारी है
और क्या शाएरी हमारी है

आप करते हैं शबनमी बातें
और मिरी प्यास रेग-ज़ारी है

अब कहाँ दश्त में जुनूँ वाले
जिस को देखो वही शिकारी है

मेरे आँसू नहीं हैं ला-वारिस
इक तबस्सुम से रिश्ते-दारी है