उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek haqiqat ke do mahmil husn-o-mohabbat donon hain

एक हक़ीक़त के दो महमिल हुस्न-ओ-मोहब्बत दोनों हैं

ایک حقیقت کے دو محمل حسن و محبت دونوں ہیں

शायर: Zaheen Shah Taji8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक हक़ीक़त के दो महमिल हुस्न-ओ-मोहब्बत दोनों हैं
ख़ल्वत-ख़ल्वत महफ़िल-महफ़िल हुस्न-ओ-मोहब्बत दोनों हैं

सब से तन्हा सब में शामिल हुस्न-ओ-मोहब्बत दोनों हैं
कितने आसाँ कितने मुश्किल हुस्न-ओ-मोहब्बत दोनों हैं

अपने अपने आईने में देखते हैं मुँह अपना अपना
अपने अपने आप मुक़ाबिल हुस्न-ओ-मोहब्बत दोनों हैं

गाहे राही गाहे रहज़न गाहे रहरव गाहे रहबर
गाहे जादा गाहे मंज़िल हुस्न-ओ-मोहब्बत दोनों हैं

एक हक़ीक़त के दो पहलू हर पहलू में लाखों पहलू
हर जल्वा हर दीदा हर दिल हुस्न-ओ-मोहब्बत दोनों हैं

दाना दाना ख़ोशा ख़ोशा मज़रा' मज़रा' बिजली बिजली
ख़िर्मन ख़िर्मन हासिल हासिल हुस्न-ओ-मोहब्बत दोनों हैं

आप हैं दरिया आप हैं कश्ती आप ही कश्ती-बाँ अपने
गाहे तूफ़ाँ गाहे साहिल हुस्न-ओ-मोहब्बत दोनों हैं

'इश्क़ 'ज़हीन' ईमान है मेरा हुस्न है मुझ को जाँ से प्यारा
मेरी फ़ितरत ही में शामिल हुस्न-ओ-मोहब्बत दोनों हैं