उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dushmanon ne jo dushmani ki hai

दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है

دشمنوں نے جو دشمنی کی ہے

शायर: Habib Jalib7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है
दोस्तों ने भी क्या कमी की है

ख़ामुशी पर हैं लोग ज़ेर-ए-इताब
और हम ने तो बात भी की है

मुतमइन है ज़मीर तो अपना
बात सारी ज़मीर ही की है

अपनी तो दास्ताँ है बस इतनी
ग़म उठाए हैं शाएरी की है

अब नज़र में नहीं है एक ही फूल
फ़िक्र हम को कली कली की है

पा सकेंगे न उम्र भर जिस को
जुस्तुजू आज भी उसी की है

जब मह-ओ-महर बुझ गए 'जालिब'
हम ने अश्कों से रौशनी की है