उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dua ka TuTa hua harf sard aah mein hai

दुआ का टूटा हुआ हर्फ़ सर्द आह में है

دعا کا ٹوٹا ہوا حرف سرد آہ میں ہے

शायर: Parveen Shakir7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुआ का टूटा हुआ हर्फ़ सर्द आह में है
तिरी जुदाई का मंज़र अभी निगाह में है

तिरे बदलने के बा-वस्फ़ तुझ को चाहा है
ये ए'तिराफ़ भी शामिल मिरे गुनाह में है

अज़ाब देगा तो फिर मुझ को ख़्वाब भी देगा
मैं मुतमइन हूँ मिरा दिल तिरी पनाह में है

बिखर चुका है मगर मुस्कुरा के मिलता है
वो रख रखाव अभी मेरे कज-कुलाह में है

जिसे बहार के मेहमान ख़ाली छोड़ गए
वो इक मकान अभी तक मकीं की चाह में है

यही वो दिन थे जब इक दूसरे को पाया था
हमारी साल-गिरह ठीक अब के माह में है

मैं बच भी जाऊँ तो तन्हाई मार डालेगी
मिरे क़बीले का हर फ़र्द क़त्ल-गाह में है