उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dost kya KHud ko bhi pursish ki ijazat nahin di

दोस्त क्या ख़ुद को भी पुर्सिश की इजाज़त नहीं दी

دوست کیا خود کو بھی پرسش کی اجازت نہیں دی

शायर: Iftikhar Arif6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दोस्त क्या ख़ुद को भी पुर्सिश की इजाज़त नहीं दी
दिल को ख़ूँ होने दिया आँख को ज़हमत नहीं दी

हम भी उस सिलसिला-ए-इश्क़ में बैअत हैं जिसे
हिज्र ने दुख न दिया वस्ल ने राहत नहीं दी

हम भी इक शाम बहुत उलझे हुए थे ख़ुद में
एक शाम उस को भी हालात ने मोहलत नहीं दी

आजिज़ी बख़्शी गई तमकनत-ए-फ़क़्र के साथ
देने वाले ने हमें कौन सी दौलत नहीं दी

बेवफ़ा दोस्त कभी लौट के आए तो उन्हें
हम ने इज़हार-ए-नदामत की अज़िय्यत नहीं दी

दिल कभी ख़्वाब के पीछे कभी दुनिया की तरफ़
एक ने अज्र दिया एक ने उजरत नहीं दी