उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil se ek yaad bhula di gai hai

दिल से इक याद भुला दी गई है

دل سے اک یاد بھلا دی گئی ہے

शायर: Nadeem Bhabha8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल से इक याद भुला दी गई है
किसी ग़फ़लत की सज़ा दी गई है

मैं ने मंज़िल की दुआ माँगी थी
मेरी रफ़्तार बढ़ा दी गई है

ऐब दीवार के होंगे ज़ाहिर
मेरी तस्वीर हटा दी गई है

मैं ने इक दिल पे हुकूमत क्या की
मुझे तलवार थमा दी गई है

अब मोहब्बत का सबब है वहशत
वर्ना हसरत तो मिटा दी गई है

अब यहाँ से नहीं जा सकता कोई
अब यहाँ शम्अ' जला दी गई है

मुझ में अब फूल नहीं नहीं खिल सकते
मेरी अब ख़ाक उड़ा दी गई है

इस लिए जम के यहाँ बैठा हूँ
मुझ को मेरी ही जगह दी गई है