उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil se ek pal bhi juda ho ye gawara hi nahin

दिल से इक पल भी जुदा हो ये गवारा ही नहीं

دل سے اک پل بھی جدا ہو یہ گوارا ہی نہیں

शायर: Kaleem Aajiz8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल से इक पल भी जुदा हो ये गवारा ही नहीं
हम को अब दर्द से बढ़ कर कोई प्यारा ही नहीं

तेरे ग़म ने किया ये हाल ख़ुशी है इस की
रंज इस का है कि ये हाल हमारा ही नहीं

हम जो मरते हैं मोहब्बत में तो मरने दीजे
इस में मरने के 'अलावा कोई चारा ही नहीं

आज दुनिया में बड़ी बात है इज़हार-ए-वफ़ा
क्या करें हम को ये तौहीन गवारा ही नहीं

ये तो इक फ़र्ज़ था ऐ गेसु-ए-दौराँ अपना
हम ने उजरत के लिए तुझ को सँवारा ही नहीं

ऐसा कुछ लुत्फ़ मिला 'इश्क़ की मज़दूरी में
दर्द का बोझ कभी सर से उतारा ही नहीं

ख़ूब आगाह तक़ाज़ा-ए-जुनूँ से हम हैं
क्या बताएँ अभी मौसम का इशारा ही नहीं

शर्म होगी तो ख़ुद आएगी पलट कर 'आजिज़'
हम ने जाती हुई दुनिया को पुकारा ही नहीं