उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil pe ek turfa qayamat karna

दिल पे इक तुर्फ़ा क़यामत करना

دل پہ اک طرفہ قیامت کرنا

शायर: Parveen Shakir6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल पे इक तुर्फ़ा क़यामत करना
मुस्कुराते हुए रुख़्सत करना

अच्छी आँखें जो मिली हैं उस को
कुछ तो लाज़िम हुआ वहशत करना

जुर्म किस का था सज़ा किस को मिली
क्या गई बात पे हुज्जत करना

कौन चाहेगा तुम्हें मेरी तरह
अब किसी से न मोहब्बत करना

जैसे औरों से मिला करते हो
हम से मिलने की भी सूरत करना

घर का दरवाज़ा खुला रक्खा है
वक़्त मिल जाए तो ज़हमत करना