उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil mein rahe wo shaKHs ragon mein rawan na ho

दिल में रहे वो शख़्स रगों में रवाँ न हो

دل میں رہے وہ شخص رگوں میں رواں نہ ہو

शायर: Osama Khalid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल में रहे वो शख़्स रगों में रवाँ न हो
मैं चाहता हूँ ज़ख़्म-ए-जिगर का निशाँ न हो

दस्तक सुनी तो रूह की चीख़ें निकल गईं
जैसे कोई बदन में जहाँ था वहाँ न हो

इक उम्र हो कि जिस में मयस्सर हों सिगरटें
इक दोस्ती हो जिस में ये सूद-ओ-ज़ियाँ न हो

इक ख़ुश-कलाम पूछे तुम्हें चाहिए सुकूँ
इक ख़ुश-कलाम पूछे मगर मुझ से हाँ न हो

मैं चाहता हूँ एक हो बस एक हम-सफ़र
ऐसा जो मेरे दिल की तरह बद-ज़बाँ न हो