उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil khicha jata hai KHud hi ku-e-jaanan ki taraf

दिल खिचा जाता है ख़ुद ही कू-ए-जानाँ की तरफ़

دل کھچا جاتا ہے خود ہی کوئے جاناں کی طرف

शायर: Zaheen Shah Taji4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल खिचा जाता है ख़ुद ही कू-ए-जानाँ की तरफ़
देखिए देखा भी जाए रू-ए-जानाँ की तरफ़

आसमाँ पर माह-ए-नौ का'बे में मेहराब-ए-हरम
ये इशारे हैं ख़म-ए-अबरू-ए-जानाँ की तरफ़

हुस्न तक पहुँचा है ग़म का सिलसिला भी 'इश्क़ में
बरहमी दिल की चली गेसू-ए-जानाँ की तरफ़

एक ही मंज़िल पे जा कर मिल गए दोनों 'ज़हीन'
वो चले सू-ए-हरम हम कू-ए-जानाँ की तरफ़