उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil ka har ek dagh charaghan se kam nahin

दिल का हर एक दाग़ चराग़ाँ से कम नहीं

دل کا ہر ایک داغ چراغاں سے کم نہیں

शायर: Hafeez Shahid8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल का हर एक दाग़ चराग़ाँ से कम नहीं
मेरी ख़िज़ाँ भी फ़स्ल-ए-बहाराँ से कम नहीं

इस में है ख़ून-ए-दिल का समुंदर छुपा हुआ
आँखों में एक अश्क भी तूफ़ाँ से कम नहीं

यादों में हैं गुलाब से चेहरे सजे हुए
शहर-ए-ख़याल कूचा-ए-जानाँ से कम नहीं

है ख़ाक पर नशिस्त फ़लक पर उड़ान है
मेरी ज़मीं भी तख़्त-ए-सुलैमाँ से कम नहीं

जीने का हौसला भी मयस्सर न हो जिसे
उस की सहर भी शाम-ए-ग़रीबाँ से कम नहीं

निकले किसी की याद में आँसू जो आँख से
मेरे लिए वो ला'ल-ए-बदख़्शाँ से कम नहीं

आँखों के सामने हैं मनाज़िर अजीब से
ये जागना भी ख़्वाब-ए-परेशाँ से कम नहीं

'शाहिद' फ़िराक़-ए-याद में ये दिल का हाल है
वीरानियों में दश्त-ओ-बयाबाँ से कम नहीं