उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil hua teri nazar se faizyab

दिल हुआ तेरी नज़र से फ़ैज़याब

دل ہوا تیری نظر سے فیضیاب

शायर: Zaheen Shah Taji9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल हुआ तेरी नज़र से फ़ैज़याब
मैं तिरा जल्वा न तू मेरा हिजाब

तुम हसीनान-ए-जहाँ में मुंतख़ब
और मेरा दिल तुम्हारा इंतिख़ाब

उन को मुझ से मुझ को उन से है हिजाब
देखिए पहले उठे किस का नक़ाब

सरज़मीन-ए-दिल में सर-गर्म-ए-सफ़र
थे हज़ारों चाँद लाखों आफ़्ताब

मौज ज़ाहिर है कि पेच-ओ-ताब-ए-मौज
मौज क्या है दर-हक़ीक़त पेच-ओ-ताब

वो जिसे दुनिया समझती है सुकूँ
दर-हक़ीक़त है कमाल-ए-इज़्तिराब

ख़ाक बन कर कू-ए-जानाँ में रहे
आदमी को वर्ना मिट्टी है ख़राब

ता-ब-कय आ कर निज़ा'-ए-कुफ़्र-ओ-दीं
तुम उठा दो रू-ए-रंगीं से नक़ाब

ख़ाकसारी हम को ज़ेबा है 'ज़हीन'
हम कि हैं दिलदारगान-ए-बूतुराब