उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil-e-fasurda ko pyari nazar se pyar na kar

दिल-ए-फ़सुर्दा को प्यारी नज़र से प्यार न कर

دل فسردہ کو پیاری نظر سے پیار نہ کر

शायर: Zaheen Shah Taji5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल-ए-फ़सुर्दा को प्यारी नज़र से प्यार न कर
ख़िज़ाँ के सामने शर्मिंदा-ए-बहार न कर

कमाल-ए-होश यहाँ ग़म को ग़म समझना है
किसी को ग़म की हक़ीक़त का राज़दार न कर

हज़ार बार तवज्जोह का शुक्रिया लेकिन
जो वज़' निभ न सके दोस्त इख़्तियार न कर

वो जल्वा-गर हैं तिरे सामने निगाह उठा
जहाँ नज़र की ज़रूरत है इंतिज़ार न कर

'ज़हीन' तर्क-ए-मोहब्बत करे ख़ुदा न करे
ये जिब्रईल कहें तो भी ए'तिबार न कर