उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dipakon mein battiyan rah jaengi

दीपकों में बत्तियाँ रह जाएँगी

دیپکوں میں بتیاں رہ جائیں گی

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दीपकों में बत्तियाँ रह जाएँगी
तिलमिला कर आँधियाँ रह जाएँगी

यूँ तो हर पर्बत फ़ना हो जाएगा
याद बस ऊँचाइयाँ रह जाएँगी

धूप चाहे जितने दरिया सोख ले
देखना गहराइयाँ रह जाएँगी

वो करेंगी फिर मुकम्मल दास्ताँ
दार पर जो रस्सियाँ रह जाएँगी

जोड़ देंगे ज़िंदगी की राह में
आप से जो दूरियाँ रह जाएँगी

शहर से बाहर निकल कर ज़ह्न में
बंद होती खिड़कियाँ रह जाएँगी

दुख तो ये है आशियाँ जलने के बा'द
बादलों में बिजलियाँ रह जाएँगी