उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dhup sat rangon mein phailti hai aankhon par

धूप सात रंगों में फैलती है आँखों पर

دھوپ سات رنگوں میں پھیلتی ہے آنکھوں پر

शायर: Parveen Shakir6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

धूप सात रंगों में फैलती है आँखों पर
बर्फ़ जब पिघलती है उस की नर्म पलकों पर

फिर बहार के साथी आ गए ठिकानों पर
सुर्ख़ सुर्ख़ घर निकले सब्ज़ सब्ज़ शाख़ों पर

जिस्म ओ जाँ से उतरेगी गर्द पिछले मौसम की
धो रही हैं सब चिड़ियाँ अपने पंख चश्मों पर

सारी रात सोते में मुस्कुरा रहा था वो
जैसे कोई सपना सा काँपता था होंटों पर

तितलियाँ पकड़ने में दूर तक निकल जाना
कितना अच्छा लगता है फूल जैसे बच्चों पर

लहर लहर किरनों को छेड़ कर गुज़रती है
चाँदनी उतरती है जब शरीर झरनों पर