उर्दू शायरी · ग़ज़ल

der se apne apne ghere mein

देर से अपने अपने घेरे में

دیر سے اپنے اپنے گھیرے میں

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

देर से अपने अपने घेरे में
लोग बैठे हुए हैं रस्ते में

एक गाहक था वो भी छोड़ गया
अब रखेंगे दुकान अकेले में

मैं ने पिंजरा तो तोड़ डाला मगर
फ़ाख़्ता आ गई लपेटे में

बीन बजते ही एक और नागिन
नाचने लगती है सपेरे में

उस के क़दमों में डाल पहला फूल
जिस ने मिट्टी भरी थी गमले में

घर में इक आइना भी होता था
बस वही ढूँडता हूँ मलबे में

बच्चे-बच्चे को कर रहा हूँ सलाम
उस के कूचे के पहले फेरे में

एक मछली जो रेत पर तड़पी
जान सी पड़ गई मछेरे में