उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dekh jurm-o-saza ki baat na kar

देख जुर्म-ओ-सज़ा की बात न कर

دیکھ جرم و سزا کی بات نہ کر

शायर: Davarka Das Shola9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

देख जुर्म-ओ-सज़ा की बात न कर
मय-कदे में ख़ुदा की बात न कर

मैं तो बे-मेहरियों का 'आदी हूँ
मुझ से मेहर-ओ-वफ़ा की बात न कर

शौक़-ए-बे-मुद्दआ' का मारा हूँ
शौक़-ए-बे-मुद्दआ' की बात न कर

वो तो मुद्दत हुई कि टूट गया
मेरे दस्त-ए-दु'आ की बात न कर

जो नहीं इख़्तियार में मेरे
उस बुत-ए-बेवफ़ा की बात न कर

'इश्क़ की इंतिहा को देख ज़रा
'इश्क़ की इब्तिदा की बात न कर

क्या मिला फ़िक्र की रसाई से
मेरी फ़िक्र-ए-रसा की बात न कर

इस की तक़दीर में ख़राबी थी
इस दिल-ए-मुब्तला की बात न कर

जो भी होना था हो गया 'शो'ला'
करम-ए-नाख़ुदा की बात न कर