उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apni bechaargi pe ro na sake

अपनी बेचारगी पे रो न सके

اپنی بے چارگی پہ رو نہ سکے

शायर: Davarka Das Shola4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपनी बेचारगी पे रो न सके
तेरे क्या होते अपने हो न सके

ज़िंदगी और वो भी माँगे की
हम नदामत का दाग़ धो न सके

ख़ुद-फ़रेबी की इंतिहा ये है
दिल सी बेकार शय भी खो न सके

ना-ख़ुदा के बग़ैर कुछ न बना
अपनी कश्ती भी ख़ुद डुबो न सके