उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dard kab dil mein mehrban na raha

दर्द कब दिल में मेहरबाँ न रहा

درد کب دل میں مہرباں نہ رہا

शायर: Kaleem Aajiz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दर्द कब दिल में मेहरबाँ न रहा
हाँ मगर क़ाबिल-ए-बयाँ न रहा

हम जो गुलशन में थे बहार न थी
जब बहार आई आशियाँ न रहा

ग़म गराँ जब न था गराँ था मुझे
जब गराँ हो गया गराँ न रहा

दोस्तों का करम मआ'ज़-अल्लाह
शिकवा-ए-जौर-ए-दुश्मनाँ न रहा

बिजलियों को दुआएँ देता हूँ
दोश पर बार-ए-आशियाँ न रहा