उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dam-e-KHud-agahi mein zamana chhupa hua

दाम-ए-ख़ुद-आगही में ज़माना छुपा हुआ

دام خود آگہی میں زمانہ چھپا ہوا

शायर: Zaheen Shah Taji5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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दाम-ए-ख़ुद-आगही में ज़माना छुपा हुआ
फैला हुआ दरख़्त है दाना छुपा हुआ

बाज़ार बन गया है ख़ज़ाना छुपा हुआ
बेगाना रू-ब-रू है यगाना छुपा हुआ

पहलू में दिल है दिल में तड़प है तड़प में सोज़
किस सोज़-ओ-साज़ में है तराना छुपा हुआ

यादश-ब-ख़ैर दिल नज़र आती है वो नज़र
नोक-ए-ख़दंग में है निशाना छुपा हुआ

कैसे 'ज़हीन' ग़म में है का'बा सियाह-पोश
कब से है घर में साहब-ए-ख़ाना छुपा हुआ