उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chiKHen lambi ho jati hain

चीख़ें लम्बी हो जाती हैं

چیخیں لمبی ہو جاتی ہیں

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चीख़ें लम्बी हो जाती हैं
तो ख़ामोशी हो जाती हैं

महँगे सपने मत देखा कर
आँखें ख़ाली हो जाती हैं

शा'इर महँगे हो जाएँ तो
ग़ज़लें सस्ती हो जाती हैं

बर्ग-ओ-बार हरा रखने में
शाख़ें पीली हो जाती हैं

एक दिया रौशन करने में
रातें काली हो जाती हैं

कोई ज़बाँ हो दीवानों में
बातें फिर भी हो जाती हैं

पत्थर-वत्थर भरते रहिए
ग़ज़लें भारी हो जाती हैं