उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chalti sanson ko jam karne laga

चलती साँसों को जाम करने लगा

چلتی سانسوں کو جام کرنے لگا

शायर: Fahmi Badayuni6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चलती साँसों को जाम करने लगा
वो नज़र से कलाम करने लगा

रात फ़रहाद ख़्वाब में आया
और फ़र्शी सलाम करने लगा

फिर मैं ज़हरीले कार-ख़ानों में
ज़िंदा रहने का काम करने लगा

साफ़ इंकार कर नहीं पाया
वो मिरा एहतिराम करने लगा

लैला घर में सिलाई करने लगी
क़ैस दिल्ली में काम करने लगा

हिज्र के माल से दिल-ए-नादाँ
वस्ल का इंतिज़ाम करने लगा