उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bhul jaana tha to phir apna banaya kyun tha

भूल जाना था तो फिर अपना बनाया क्यूँ था

بھول جانا تھا تو پھر اپنا بنایا کیوں تھا

शायर: Saba Afghani5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

भूल जाना था तो फिर अपना बनाया क्यूँ था
तुम ने उल्फ़त का यक़ीं मुझ को दिलाया क्यूँ था

एक भटके हुए राही को सहारा दे कर
झूटी मंज़िल का निशाँ तुम ने दिखाया क्यूँ था

ख़ुद ही तूफ़ान उठाना था मोहब्बत में अगर
डूबने से मिरी कश्ती को बचाया क्यूँ था

जिस की ताबीर अब अश्कों के सिवा कुछ भी नहीं
ख़्वाब ऐसा मेरी आँखों को दिखाया क्यूँ था

अपने अंजाम पे अब क्यूँ हो पशेमान 'सबा'
एक बेदर्द से दिल तुम ने लगाया क्यूँ था