उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bhula bhi de use jo baat ho gai pyare

भुला भी दे उसे जो बात हो गई प्यारे

بھلا بھی دے اسے جو بات ہو گئی پیارے

शायर: Habib Jalib6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

भुला भी दे उसे जो बात हो गई प्यारे
नए चराग़ जला रात हो गई प्यारे

तिरी निगाह-ए-पशेमाँ को कैसे देखूँगा
कभी जो तुझ से मुलाक़ात हो गई प्यारे

न तेरी याद न दुनिया का ग़म न अपना ख़याल
अजीब सूरत-ए-हालात हो गई प्यारे

उदास उदास हैं शमएँ बुझे बुझे साग़र
ये कैसी शाम-ए-ख़राबात हो गई प्यारे

वफ़ा का नाम न लेगा कोई ज़माने में
हम अहल-ए-दिल को अगर मात हो गई प्यारे

तुम्हें तो नाज़ बहुत दोस्तों पे था 'जालिब'
अलग-थलग से हो क्या बात हो गई प्यारे