उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bhari mahfil mein tanha dekhna hai

भरी महफ़िल में तन्हा देखना है

بھری محفل میں تنہا دیکھنا ہے

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

भरी महफ़िल में तन्हा देखना है
उसे इस बार इतना देखना है

तिरी दुनिया से अब जाना पड़ेगा
ख़ुदा वाली भी दुनिया देखना है

अदाकारों के नख़रे लोग उठाएँ
हमें तो बस तमाशा देखना है

मिरी पहली नज़र लौटा दे मुझ को
तिरी जानिब दुबारा देखना है

नया क्या है मकाँ से ला-मकाँ तक
वही ख़ुद को दिखाना देखना है

मिरी दिलचस्पियाँ पर्वाज़ में हैं
उसे पिंजरे में चिड़िया देखना है

कहाँ पर क्यों भटक जाता हूँ आख़िर
तिरे कूचे का नक़्शा देखना है

नहीं मिलना है कुछ नज़रें उठा कर
हमें तो सिर्फ़ रस्ता देखना है