उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bas tumhaara makan dikhai diya

बस तुम्हारा मकाँ दिखाई दिया

بس تمہارا مکاں دکھائی دیا

शायर: Fahmi Badayuni5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बस तुम्हारा मकाँ दिखाई दिया
जिस में सारा जहाँ दिखाई दिया

वो वहीं था जहाँ दिखाई दिया
इश्क़ में ये कहाँ दिखाई दिया

उम्र भर पर नहीं मिले हम को
उम्र भर आसमाँ दिखाई दिया

रोज़ दीदा-वरों से कहता हूँ
तू कहाँ था कहाँ दिखाई दिया

अच्छे-ख़ासे क़फ़स में रहते थे
जाने क्यूँ आसमाँ दिखाई दिया