उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baDi gahri KHamoshi ho gai hai

बड़ी गहरी ख़मोशी हो गई है

بڑی گہری خموشی ہو گئی ہے

शायर: Fahmi Badayuni5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बड़ी गहरी ख़मोशी हो गई है
हमारी चीख़ लम्बी हो गई है

वही जीना वही मरना है लेकिन
ज़रा तरतीब उल्टी हो गई है

मुसलसल रहते रहते आप के साथ
मोहब्बत आप जैसी हो गई है

तुम्हारा बैग ख़ाली ही रहेगा
हमारी जेब ख़ाली हो गई है

मिरे अल्फ़ाज़ सस्ते हो गए हैं
तिरी आवाज़ महँगी हो गई है