उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baDha di ek nazar mein tu ne kya tauqir patthar ki

बढ़ा दी इक नज़र में तू ने क्या तौक़ीर पत्थर की

بڑھا دی اک نظر میں تو نے کیا توقیر پتھر کی

शायर: Habeeb Moosavi10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बढ़ा दी इक नज़र में तू ने क्या तौक़ीर पत्थर की
बना कोहल-उल-बसर अल्लाह रे तक़दीर पत्थर की

असीर-ए-ज़ुल्फ़ क्यूँकर छुट सकेंगे क़ैद-ए-वहशत से
कि है हर जादा-ए-दश्त-ए-जुनूँ ज़ंजीर पत्थर की

ये जल्वा है कुनिश्त-ओ-दैर में साने की क़ुदरत का
कि दावा-ए-ख़ुदाई करती है तस्वीर पत्थर की

तलाश-ए-रिज़्क़ में हो आसिया की तरह सरगर्दां
अगर दाना है तू भी सीख ले तदबीर पत्थर की

बता संग-ए-जराहत आ के ज़ख़्म-ए-तेग़-ए-अबरू पर
हुआ अच्छा तिरे आशिक़ को दी ताज़ीर पत्थर की

फ़ुसून-ए-चश्म-ए-क़ातिल से बना हूँ सेहर का पुतला
जो छू ले मेरी गर्दन को तो हो शमशीर पत्थर की

शब-ए-फ़ुर्क़त में जो सोचे थे करते वो शिकायत क्या
नज़र करते ही उन पर बन गए तस्वीर पत्थर की

न निकली है न निकलेगी जमी है दिल में जो उन के
मिटाने से भी मिटती है कहीं तहरीर पत्थर की

सज़ा-ए-इश्क़-ए-मिज़्गान-ए-बुतान-ए-संग-दिल पाई
हुई बारिश हर इक जानिब से हम पर तीर पत्थर की

न फ़र्क़ आया 'हबीब'-ए-साबिर-ओ-शाकिर की राहत में
बना दुनिया में क़िस्मत का लिखा तहरीर पत्थर की