उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baDe bane the jalib sahab piTe saDak ke bich

बड़े बने थे 'जालिब' साहब पिटे सड़क के बीच

بڑے بنے تھے جالبؔ صاحب پٹے سڑک کے بیچ

शायर: Habib Jalib3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बड़े बने थे 'जालिब' साहब पिटे सड़क के बीच
गोली खाई लाठी खाई गिरे सड़क के बीच

कभी गिरेबाँ चाक हुआ और कभी हुआ दिल ख़ून
हमें तो यूँही मिले सुख़न के सिले सड़क के बीच

जिस्म पे जो ज़ख़्मों के निशाँ हैं अपने तमग़े हैं
मिली है ऐसी दाद वफ़ा की किसे सड़क के बीच