उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aql ka har sawal kaT diya

'अक़्ल का हर सवाल काट दिया

عقل کا ہر سوال کاٹ دیا

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'अक़्ल का हर सवाल काट दिया
बे-ख़ुदी ने वबाल काट दिया

मछलियाँ तो फँसी हुई थीं मगर
एक कछुए ने जाल काट दिया

फ़ा'इलातुन ने जब नज़र बदली
हम ने ताज़ा ख़याल काट दिया

इक ज़रा आँख लग गई थी रात
क़िस्सा-गो ने वबाल काट दिया

काम मुश्किल था पर सवेरे तक
मैं ने माज़ी से हाल काट दिया

एक दिन आँसुओं की तुरशी ने
आप का भी रुमाल काट दिया

राह में आसमानी लश्कर को
जो मिला पाएमाल काट दिया