उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ana bedar hoti ja rahi hai

अना बेदार होती जा रही है

انا بے دار ہوتی جا رہی ہے

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अना बेदार होती जा रही है
वफ़ा दुश्वार होती जा रही है

तुझे तरतीब में कैसे रखें हम
तिरी भर-मार होती जा रही है

हमारा दर्द हावी हो गया है
दवा बीमार होती जा रही है

हिला करती थी नज़रों से जो चिलमन
वो अब दीवार होती जा रही है

तिरी ख़ुशबू जो कश्ती में बसी थी
वो अब पतवार होती जा रही है

टिका रक्खी है इक बहते दिए पर
नज़र उस पार होती जा रही है

धुआँ चिंगारियाँ कोहराम चीख़ें
हवा अख़बार होती जा रही है