उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aashiq hue to ishq mein hoshyar kyun na the

'आशिक़ हुए तो 'इश्क़ में होश्यार क्यूँ न थे

عاشق ہوئے تو عشق میں ہشیار کیوں نہ تھے

शायर: Varis Kirmani5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'आशिक़ हुए तो 'इश्क़ में होश्यार क्यूँ न थे
हम इन के मद्ह-ख़्वाँ सर-ए-बाज़ार क्यूँ न थे

हाँ जब सितम को 'ऐन करम कह रहे थे लोग
हम भी शरीक-ए-गर्मी-ए-गुफ़्तार क्यूँ न थे

जब चल रहा था वक़्त पे जादू निगाह का
इक हम असीर-ए-चशम-ए-फुसूँ-कार क्यूँ न थे

अब क्या शहीद-ए-नाज़ बने फिर रहे हैं लोग
मरने का शौक़ था तो सर-ए-दार क्यूँ न थे

'वारिस' ये शा'इरी सम-ए-क़ातिल से कम नहीं
आप इस बला-ए-जाँ से ख़बर-दार क्यूँ न थे