नात लिरिक्स

Zikr-e-Ahmad Se Seena Saja Hai | Ishq Hai Ye Tamasha Nahin Hai | Zikr-e-Aaqa Se Seena Saja Hai

ज़िक्र-ए-अहमद से सीना सजा है | इश्क़ है ये तमाशा नहीं है | ज़िक्र-ए-आक़ा से सीना सजा है

नात ख़्वान: शादाब-ओ-पैकरशायर: मुईन जामीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ज़िक्र-ए-अहमद से सीना सजा है'इश्क़ है ये तमाशा नहीं हैवो भी दिल कोई दिल है जहाँ मेंजिस में तस्वीर-ए-तयबा नहीं है

ला-मकाँ तक है तेरी रसाईगीत गाती है सारी ख़ुदाईवो जगह ही नहीं दो जहाँ मेंजिस जगह तेरा चर्चा नहीं है

चाँद सूरज सितारों को देखाख़ुल्द-मंज़र नज़ारों को देखालौट आई मगर मेरी नज़रेंकोई भी तेरे जैसा नहीं है

ऐ मेरी मौत ! रुक जा अभी तूफिर चलेंगे जहाँ तू कहेगीअपनी मश्क़-ए-तसव्वुर में तयबामैं ने जी भर के देखा नहीं है

शिद्दत-ए-ग़म से जलता है सीनाअब तो हिन्द में मुश्किल है जीनाजल्दी, आक़ा ! बुला लो मदीनाज़िंदगी का भरोसा नहीं है

हज की दौलत जिसे मिल न पाएजाए जाए वो घर अपने जाएमाँ के क़दमों को वो चूम ले जोसंग-ए-असवद को चूमा नहीं है

ख़ाक-ए-पा-ए-नबी मुँह पे मलना'इत्र हो मुस्तफ़ा का पसीनाउन की चादर का टुकड़ा कफ़न होऔर कोई तमन्ना नहीं है

हम हुसैनी हैं कर्बल के शैदादिल कभी भी न होता है मैलाकुफ़्र की धमकियों से डरे जोसुन्नियों का कलेजा नहीं है

दुश्मन-ए-आ'ला हज़रत से कह दोख़ैर चाहे तो हम से न उलझेहम ग़ुलामान-ए-अख़्तर रज़ा हैंकोई भी हम से जीता नहीं है

काश ! हम भी मदीने को जातेहाल-ए-दिल उन को रो कर सुनातेमुफ़्लिसी से है मजबूर जामीवर्ना किस में ये जज़्बा नहीं है

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