नात लिरिक्स

Khuda Ka Noor Hai Ghalib (Part 1 | Part 2)

ख़ुदा का नूर है ग़ालिब

नात ख़्वान: आइशा अब्दुल जब्बारशायर: अज़ीज़ुल्लाह ग़ालिबउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ज़मीनों आसमानों में ख़ुदा का नूर है ग़ालिबचमकते चाँद तारों में ख़ुदा का नूर है ग़ालिब

जो खिलते हैं, महकते हैं, चमन में फूलों को देखोयहाँ के लाला-ज़ारों में ख़ुदा का नूर है ग़ालिब

कहीं पे फूल खिलते हैं, कहीं मुरझाने लगते हैंख़ज़ानों में, बहारों में ख़ुदा का नूर है ग़ालिब

वो जिस ने सारे 'आलम को समाया है, सजाया हैपहाड़ों, आबशारों में ख़ुदा का नूर है ग़ालिब

तसव्वुर में, तख़य्युल में उसे महसूस करता हूँसमंदर, रेग-ज़ारों में ख़ुदा का नूर है ग़ालिब

मुबारक हो तुम्हें, ग़ालिब ! सना-ख़्वानी, मदह-ख़्वानीकिताबुल्लाह के पारों में ख़ुदा का नूर है ग़ालिब

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