नात लिरिक्स

Zameen Maili Nahin Hoti Zaman Maila Nahin Hota | Muhammad Ke Ghulamon Ka Kafan Maila Nahin Hota

ज़मीं मैली नहीं होती ज़मन मैला नहीं होता | मुहम्मद के ग़ुलामों का कफ़न मैला नहीं होता

नात ख़्वान: शहबाज़ क़मर फ़रीदीशायर: सय्यिद नासिर हुसैन चिश्तीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ज़मीं मैली नहीं होती, ज़मन मैला नहीं होतामुहम्मद के ग़ुलामों का कफ़न मैला नहीं होता

मोहब्बत कमली वाले से वो जज़्बा है सुनो, लोगो !ये जिस मन में समा जाए, वो मन मैला नहीं होता

मोहब्बत प्यारे आक़ा से वो जज़्बा है सुनो, लोगो !ये जिस मन में समा जाए, वो मन मैला नहीं होता

नबी के पाक लंगर पर जो पलते हैं कभी उन कीज़बाँ मैली नहीं होती, सुख़न मैला नहीं होता

गुलों को चूम लेते हैं सहर नम शबनमी क़तरेनबी की ना'त सुन लें तो चमन मैला नहीं होता

जो नाम-ए-मुस्तफ़ा चूमें, नहीं दुखती कभी आँखेंपहन ले प्यार जो उन का, बदन मैला नहीं होता

तिजोरी में जो रखा है सियाही आ ही जाती हैबटे जो नाम पर उन के वो धन मैला नहीं होता

नबी का दामन-ए-रह़मत पकड़ लो, ए जहाँ वालो !रहे जब तक ये हाथों में, चलन मैला नहीं होता

मैं नाज़ाँ तो नहीं फ़न पर मगर, नासिर ! ये दा'वा हैसना-ए-मुस्तफ़ा करने से फ़न मैला नहीं होता

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