नात लिरिक्स

Zahe Muqaddar Huzoor-e-Haq Se Salam Aaya Payam Aaya

ज़हे-मुक़द्दर हुज़ूर-ए-हक़ से सलाम आया पयाम आया

नात ख़्वान: क़ारी वहीद ज़फ़र क़ासमीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ज़हे-मुक़द्दर हुज़ूर-ए-हक़ से सलाम आया, पयाम आयाझुकाओ नज़रें, बिछाओ पलकें, अदब का आ'ला मक़ाम आया

ये कौन सर से कफ़न लपेटे चला है उल्फ़त के रास्ते परफ़रिश्ते हैरत से तक रहे हैं, ये कौन ज़ी-एहतिराम आया

फ़ज़ा में लब्बैक की सदाएँ, ज़-फ़र्श ता-'अर्श गूँजती हैंहर एक क़ुर्बान हो रहा है, ज़ुबाँ पे ये किस का नाम आया

ये राह-ए-हक़ है, सँभल के चलना, यहाँ है मंज़िल क़दम क़दम परपहुँचना दर पर तो कहना, आक़ा ! सलाम लीजे ग़ुलाम आया

ये कहना, आक़ा ! बहुत से 'आशिक़ तड़पते से छोड़ आया हूँ मैंबुलावे के मुंतज़िर हैं लेकिन न सुब्ह आया, न शाम आया

दु'आ जो निकली थी दिल से आख़िर पलट के मक़बूल हो के आईवो जज़्बा जिस में तड़प थी सच्ची, वो जज़्बा आख़िर को काम आया

ख़ुदा तेरा हाफ़िज़-ओ-निगहबाँ, ओ राह-ए-बतहा के जाने वाले !नवीद-ए-सद-इंबिसात बन कर पयाम-ए-दारु-स्सलाम आया

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