नात लिरिक्स

Yaad-e-Nabi Ka Gulshan Mehka Mehka Lagta Hai

याद-ए-नबी का गुलशन महका महका लगता है

नात ख़्वान: उस्ताद नुसरत फ़तेह अली ख़ानशायर: मौलाना अब्दुल सत्तार नियाज़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हर नफ़स 'इश्क़-ए-मुहम्मद का पयामी कर लोज़िंदगी मिट के मोहब्बत में दवामी कर लोबादशाही है अगर दोनों जहाँ की दरकारदोस्तो ! आओ, मुहम्मद की ग़ुलामी कर लो

नबी की याद है सरमाया ग़म के मारों कायही तो एक वसीला है बे-सहारों का

याद-ए-नबी का गुलशन महका महका लगता हैमहफ़िल में मौजूद हैं आक़ा ऐसा लगता है

नाम-ए-मुहम्मद कितना मीठा मीठा लगता हैप्यारे नबी का ज़िक्र भी हम को प्यारा लगता है

लब पर नग़्में सल्ले-'अला के, हाथों में कश्कोलदेखो तो सरकार का मँगता कैसा लगता है

आँखों में मा-ज़ाग़ का कजला, सर ताहा का ताजकैसे कहूँ कमली वाला हम जैसा लगता है

ख़ाक हैं हम और ख़ाक ज़माना और वो नूर ही नूरकैसे कहूँ कि कमली वाला हम सा लगता है

ग़ौस, क़ुतब, अब्दाल, क़लंदर सब उन के मोहताजमेरा दाता हर दाता का दाता लगता है

आओ सुनाएँ अपने नबी को अपने ग़म की बातउन के 'इलावा कौन, नियाज़ी ! अपना लगता है

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