नात लिरिक्स

Ya Rasoolallah Ya Habiballah Ek Nazar-e-Karam Farma Jana

या रसूलल्लाह या हबीबल्लाह इक नज़र-ए-करम फ़रमा जाना

नात ख़्वान: उमेर मुनीर क़ादरीशायर: मुहम्मद शहाबुद्दीन सैफ़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !इक नज़र-ए-करम फ़रमा जानादिन रात तड़पता हूँ लिल्लाहदीदार का जाम पिला जाना

या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !इक नज़र-ए-करम फ़रमा जाना

तेरे हिज्र में दिल भी जलता हैआँखों से ख़ून उबलता हैकहीं डूब न जाऊँ तूफ़ाँ मेंबेकस को पार लगा जाना

या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !इक नज़र-ए-करम फ़रमा जाना

जीना भी सज़ा है बिन तेरेमरना भी सज़ा है बिन तेरेदुनिया के ग़मों से, मेरे नबी !बिस्मिल की जान छुड़ा जाना

या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !इक नज़र-ए-करम फ़रमा जाना

जिस वक़्त नज़ा' का 'आलम होतक़दीर का चेहरा बरहम होउस वक़्त अपने दीवाने कोअपना दीदार करा जाना

या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !इक नज़र-ए-करम फ़रमा जाना

मेरी हर कोशिश नाकाम हुईराह तकते 'उम्र तमाम हुईजब मर जाऊँ तो तुर्बत मेंइक अपनी झलक दिखला जाना

या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !इक नज़र-ए-करम फ़रमा जाना

ऐ मेरे यारो ग़म-ख़्वारो !इक मेरी नसीहत लिख लेनामुझे जब दफ़ना के जाने लगोसरकार की ना'त सुना जाना

या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !इक नज़र-ए-करम फ़रमा जाना

तेरी ना'त कहाँ, मेरी बात कहाँलाचार शहाब के बस में नहींये फूल हैं सिर्फ़ 'अक़ीदत केइन्हें कर मंज़ूर पिया जाना !

या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह !इक नज़र-ए-करम फ़रमा जाना

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