नात लिरिक्स

Mere Malik Teri Raza Ke Liye | Jaan Hazir Hai Mustafa Ke Liye

मेरे मालिक तेरी रज़ा के लिए | जान हाज़िर है मुस्तफ़ा के लिए

नात ख़्वान: उमर मुनीर क़ादरीशायर: मुहम्मद शहाबुद्दीन सैफ़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़ुदा की रज़ा चाहते हैं दो 'आलमख़ुदा चाहता है रज़ा-ए-मुहम्मद

मेरे मालिक ! तेरी रज़ा के लिएजान हाज़िर है मुस्तफ़ा के लिए

अपने क़दमोंप्यारे क़दमों से लिपट कर मुझे मर जाने दे

बड़ी हसरत हाई तेडे बूए तेमथा टेकदा टेकदा मर जावाँतेडे 'इश्क़ दा बाल के मच सोहणावल सेकदा सेकदा मर जावाँपेंडा दूरियाँ दा नाल हंजवाँ देएंज मेचदा मेचदा मर जावाँहोवे वक़्त आख़िर ते मुख सोहणातेडा वेखदा वेखदा मर जावाँ

जान हाज़िर है मुस्तफ़ा के लिए

मेरे मालिक ! तेरी रज़ा के लिए

नाम सुन के झुका लो सर अपनेसय्यिदा ज़हरा की हया के लिए

मेरे मालिक ! तेरी रज़ा के लिए

खड़े अक़्सा में अंबिया थे सभीदीद-ए-सरदार-ए-अंबिया के लिए

मेरे मालिक ! तेरी रज़ा के लिए

उन का दीदार ही मैं माँगता हूँहाथ उठते हैं जब दु'आ के लिए

मेरे मालिक ! तेरी रज़ा के लिए

ख़ाक-ए-तयबा, तबीबो ! काफ़ी है

मिट्टी पाक मदीने दी, मिट्टी पाक मदीने दीअखियाँ दा सुरमा ए सानूँ ख़ाक मदीने दी

ख़ाक-ए-तयबा, तबीबो ! काफ़ी हैमुझ से बीमार की शिफ़ा के लिए

मेरे मालिक ! तेरी रज़ा के लिए

कहीं न देखा ज़माने भर मेंजो कुछ मदीने में जा के देखा

तजल्लियों का लगा है मेलाजिधर निगाहें उठा के देखा

वो देखो देखो सुनहरी जालीइधर सवाली, उधर सवाली

क़रीब से जो भी उन के गुज़राहुज़ूर ने मुस्कुरा के देखा

'आशिक़ान-ए-नबी दु'आ माँगेशहर-ए-तयबा में बस क़ज़ा के लिए

मेरे मालिक ! तेरी रज़ा के लिए

यारो ! ग़ारों में रोए हैं आक़ासिर्फ़ अपने हर इक गदा के लिए

मेरे मालिक ! तेरी रज़ा के लिए

अबू-बक्र-ओ-'उमर हैं पहलू में

है मुन्किर जिस दे दिल विच नहीं 'इश्क़ सिद्दीक़ वली दाओ वी जाण ईमान तो ख़ाली जेड़ा दुश्मन 'उमर जरी दाजन्नत कदी न जासी जिस नूँ नहीं प्यार 'उस्मान ग़नी दाते आ'ज़म ! ओ वी वड्डा काफ़िर जेड़ा नहीं हुब्दार 'अली दा

अबू-बक्र-ओ-'उमर हैं पहलू मेंरब ने जिन को चुना वफ़ा के लिए

मेरे मालिक ! तेरी रज़ा के लिए

बुग़्ज़-ए-पंजतन में ज़ाया' मत करनानेकियाँ अपनी सब, ख़ुदा के लिए

मेरे मालिक ! तेरी रज़ा के लिए

धो लिए सब गुनाहों के दफ़्तररो के औलाद-ए-मुर्तज़ा के लिए

मेरे मालिक ! तेरी रज़ा के लिए

क्या ये कम है, शहाब ! आक़ा नेचुन लिया है मुझे सना के लिए

मेरे मालिक ! तेरी रज़ा के लिए

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