नात लिरिक्स

Ya Rasoolallah Main Kab Tak Karun Ab Intizar

या रसूलल्लाह मैं कब तक करूँ अब इंतिज़ार

नात ख़्वान: ज़ोहैब अशरफ़ीशायर: मुहम्मद शौक़ीन नवाज़ शौक़ फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या रसूलल्लाह ! मैं कब तक करूँ अब इंतिज़ारजल्द दिखला दीजिए ना सब्ज़-गुंबद की बहार

या रसूलल्लाह ! मैं कब तक करूँ अब इंतिज़ार

एक मैं हूँ हाज़िरी की आस सीने में लिएऔर कोई जा रहा है तेरे दर पर बार बार

या रसूलल्लाह ! मैं कब तक करूँ अब इंतिज़ार

बा-ख़बर हो तुम मेरे हालात से, मैं क्या कहूँकैफ़ियत इस क़ल्ब-ए-मुज़्तर की है तुम पर आशकार

या रसूलल्लाह ! मैं कब तक करूँ अब इंतिज़ार

हाज़िरी की आरज़ू में रोता हूँ सुब्ह-ओ-मसाअब बुला लो जल्द मुझ को, ऐ शह-ए-'आली-वक़ार !

या रसूलल्लाह ! मैं कब तक करूँ अब इंतिज़ार

मुफ़्लिसी की बेड़ियाँ बढ़ने नहीं देते क़दमकोई सूरत कीजिए ना, दो जहाँ के ताजदार !

या रसूलल्लाह ! मैं कब तक करूँ अब इंतिज़ार

ऐ मदीने जाने वालो ! 'अर्ज़ कर देना सलामऔर कहना हाज़िरी को है दीवाना बे-क़रार

या रसूलल्लाह ! मैं कब तक करूँ अब इंतिज़ार

मौत आए तेरे दर पर और मदफ़न हो बक़ी'आरज़ू शौक़-ए-फ़रीदी की है, ऐ 'आली-वक़ार !

या रसूलल्लाह ! मैं कब तक करूँ अब इंतिज़ार

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