नात लिरिक्स

Ya Rab Main Gunahgar Hoon Tauba Qabool Ho | Tauba Qabool Ho Meri Tauba Qabool Ho

या रब मैं गुनाहगार हूँ तौबा क़बूल हो | तौबा क़बूल हो मेरी तौबा क़बूल हो

नात ख़्वान: महमूद-उल-हसन अशरफ़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या रब ! मैं गुनाहगार हूँ, तौबा क़बूल हो'इस्याँ पे शर्मसार हूँ, तौबा क़बूल होजाँ-सोज़-ओ-दिल-फ़िगार हूँ, तौबा क़बूल होसर-ता-पा इंकिसार हूँ, तौबा क़बूल हो

तौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल होतौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल हो

गुज़री तमाम 'उम्र मेरी लहव-ओ-ल'अब मेंनेकी नहीं है कोई 'अमल की किताब मेंसालेह 'अमल भी कोई नहीं है हिसाब मेंदस्त-ए-दु'आ बुलंद है तेरी जनाब में

तौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल होतौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल हो

'ऐश-ओ-निशात ही में गुज़ारी है ज़िंदगीहर ज़ाविये से अपनी सँवारी है ज़िंदगीमेरा ख़याल ये था कि जारी है ज़िंदगीलेकिन ये हाल अब है कि भारी है ज़िंदगी

तौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल होतौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल हो

तेरे करम को, तेरी 'अता को भुला दियाआ'माल की जज़ा-ओ-सज़ा को भुला दियाताक़त मिली तो कर्ब-ओ-बला को भुला दियाहर ना-तवाँ की आह-ए-रसा को भुला दिया

तौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल होतौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल हो

मैं तो समझ रहा था कि दौलत है जिस के पासउस को न कोई ख़ौफ़ है, उस को न कुछ हरासहोगा न ज़िंदगी में किसी वक़्त वो उदासलेकिन ये मेरी भूल थी, अब मैं हूँ महव-ए-यास

तौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल होतौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल हो

मैं हूँ गुनाहगार मगर तू तो है करीममैं हूँ सियाहकार मगर तू तो है रहीममैं हूँ फ़ना-पज़ीर मगर तू तो है क़दीममैं अदना-ओ-हक़ीर सही, तू तो है 'अज़ीम

तौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल होतौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल हो

या रब ! तेरे करम, तेरी रहमत का वास्ताया रब ! तेरी 'अता, तेरी ने'मत का वास्ताया रब ! तेरे जलाल-ओ-जलालत का वास्ताया रब ! रसूल-ए-हक़ की रिसालत का वास्ता

तौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल होतौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल हो

मैं ए'तिराफ़ करता हूँ अपने क़ुसूर कामैं हो गया था ऐसे गुनाहों में मुब्तलाजिन की है आख़िरत में कड़ी से कड़ी सज़ालेकिन मुझे तो तेरे करम से है आसरा

तौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल होतौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल हो

अब तेरी बंदगी में बसर होगी ज़िंदगीमोड़ूँगा मुँह न तेरी 'इबादत से मैं कभीअब इत्तिबा' करूँगा मैं तेरे रसूल कीता-ज़िंदगी करूँगा शरी'अत की पैरवी

तौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल होतौबा क़बूल हो, मेरी तौबा क़बूल हो

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