नात लिरिक्स

Bade Lateef Hain Nazuk Se Ghar Mein Rehte Hain

बड़े लतीफ़ हैं नाज़ुक से घर में रहते हैं

नात ख़्वान: महमूद-उल-हसन अशरफ़ीशायर: सय्यिद मुहम्मद मदनी अशरफ़ अशरफ़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

बड़े लतीफ़ हैं, नाज़ुक से घर में रहते हैंमेरे हुज़ूर मेरी चश्म-ए-तर में रहते हैं

हमारे दिल में, हमारे जिगर में रहते हैंउन्हीं के घर हैं, वो अपने ही घर में रहते हैं

ये वाक़ि'आ है लिबास-ए-बशर भी धोका हैये मो'जिज़ा है लिबास-ए-बशर में रहते हैं

मक़ाम उन का न फ़र्श-ए-ज़मीं, न 'अर्श-ए-बरींवो अपने चाहने वालों के घर में रहते हैं

मलाइका भी 'अक़ीदत से देखते हैं उन्हेंजो ख़ुश-नसीब नबी के नगर में रहते हैं

यक़ीन वाले कहाँ से चले कहाँ पहुँचेजो अहल-ए-शक हैं अगर में मगर में रहते हैं

ख़ुदा के नूर को अपनी तरह समझते हैंये कौन लोग हैं ? किस के असर में रहते हैं ?

रहें वो अपनों से ग़ाफ़िल, अरे म'आज़ल्लाह !ख़ुशा-नसीब हम उन की नज़र में रहते हैं

वो और ही था जो क़ौसैन पर नज़र आयामलक तो अपनी हद-ए-बाल-ओ-पर में रहते हैं

जो, अख़्तर ! उन के तसव्वुर में सुब्ह-ओ-शाम करेंकहीं भी रहते हों, तयबा नगर में रहते हैं

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