नात लिरिक्स

Mustafa Mujtaba Khatam-ul-Ambiya | Hon Hazaron Durood-o-Salam Aap Par

मुस्तफ़ा मुज्तबा ख़ातम-उल-अंबिया | हों हज़ारों दुरूद-ओ-सलाम आप पर

नात ख़्वान: महमूद-उल-हसन अशरफ़ीशायर: पीर सय्यिद मुईन-उल-हक़ गीलानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मुस्तफ़ा मुज्तबा ख़ातम-उल-अंबिया !हों हज़ारों दुरूद-ओ-सलाम आप परशान-ए-रब्ब-उल-'उला सूरत-ए-हक़-नुमाहों हज़ारों दुरूद-ओ-सलाम आप पर

आप हैं वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-अर्ज़-ओ-समाआप ही इब्तिदा, आप ही इंतिहासिदरतुल-मुंतहा आप के ज़ेर-ए-पाहों हज़ारों दुरूद-ओ-सलाम आप पर

क़ाबा-क़ौसैन है आप की शान मेंना'त है आप की सारे क़ुरआन मेंआप की ज़ात ममदूह-ए-ज़ात-ए-ख़ुदाहों हज़ारों दुरूद-ओ-सलाम आप पर

आप शम्सुद्दुहा, आप बदरुद्दुजाआप नूर-उल-हुदा, आप ख़ैर-उल-वराशम'-ए-बज़्म-ए-हुदा, शाहिद-ए-किब्रियाहों हज़ारों दुरूद-ओ-सलाम आप पर

ज़ात-ए-मुतलक़ का रौशन निशाँ बन गईइस्म-ए-आ'ज़म जभी तो है ज़ात आप कीइस वसीले सुनी रब ने सब की दु'आहों हज़ारों दुरूद-ओ-सलाम आप पर

आप की है 'अता, अम्न-ओ-'अद्ल-ओ-जज़ाहुस्न-ए-ख़ुल्क़ और तक़्वा-ओ-जूद-ओ-सख़ारिफ़्क़-ओ-ईसार, 'अज़्म और मेहर-ओ-वफ़ाहों हज़ारों दुरूद-ओ-सलाम आप पर

भेजता है दुरूद आप पर ख़ुद ख़ुदासब फ़रिश्ते, सभी अंबिया औलिया'अर्ज़ करता है ये 'आजिज़-ओ-पुर-ख़ताहों हज़ारों दुरूद-ओ-सलाम आप पर

आप को हक़ ने मुख़्तार-ए-'आलम कियाकी 'अता आप को ने'मत-ए-दो-सराएक रब से लिया, कुल जहाँ को दियाहों हज़ारों दुरूद-ओ-सलाम आप पर

आप हों मेरा दिल, मेरी जाँ, मेरा दींइस से आगे तलब और कोई नहींइक यही है तमन्ना, यही इल्तिजाहों हज़ारों दुरूद-ओ-सलाम आप पर

आप के दर पे झुकती रहे ये जबींछोड़ कर आप का दर न जाएँ कहींआप का ये गदा आप पर हो फ़िदाहों हज़ारों दुरूद-ओ-सलाम आप पर

सदक़ा हसनैन-ओ-ज़हरा-ओ-मौला-'अलीसदक़ा ग़ौस-ए-जली, सदक़ा हिन्दल वलीसदक़ा मेहर-ए-'अली हाजतें हों रवाहों हज़ारों दुरूद-ओ-सलाम आप पर

है गदा आप का ये मु'ईन-ए-हज़ींमा-सिवा आप के इस का कोई नहींइस पे हो जाए नज़र-ए-'इनायत, शहा !हों हज़ारों दुरूद-ओ-सलाम आप पर

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