नात लिरिक्स

Ya Nabi Nuskha-e-Taskheer Ko Main Jaan Gaya

या नबी नुस्ख़ा-ए-तस्ख़ीर को मैं जान गया

नात ख़्वान: अल्हाज यूसुफ़ मेमनशायर: मौलाना स'ईद ए'जाज़ कामटवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

या नबी ! नुस्ख़ा-ए-तस्ख़ीर को मैं जान गयाउस को सब मान गए, आप को जो मान गया

हर मकाँ वाले को करता हुआ हैरान गयाला-मकाँ में मेरा पैग़ंबर-ए-ज़ीशान गया

डूबते डूबते जब उन की तरफ़ ध्यान गयाले के साहिल की तरफ़ ख़ुद मुझे तूफ़ान गया

हर बुलंदी मुझे पस्ती की तरह आई नज़रजब मेरा गुंबद-ए-ख़ज़रा की तरफ़ ध्यान गया

ग़ैब का जानने वाला उन्हें जब मैं ने कहाबात ईमान की थी कुफ़्र बुरा मान गया

'इश्क़-ए-सरकार-ए-दो-'आलम के सिवा कुछ भी नहींज़िंदगी ! तेरी हक़ीक़त को मैं पहचान गया

बस इरादे ही से मौजों का हुआ काम तमामया नबी कहना ही चाहा था कि तूफ़ान गया

शुक्र सद-शुक्र कि मौत आई दर-ए-अहमद परअब मदीने से कहीं जाने का इमकान गया

जैसे बरसों की मुलाक़ात रही हो उन सेक़ब्र में देखते ही मैं उन्हें पहचान गया

हाथ मलती ही रही देख के दोज़ख़, यारो !ले के जन्नत में हमें तयबा का सुलतान गया

देखो किस शान से कर्बल का वो मेहमान गयानेज़े की नोक पे पढ़ता हुआ क़ुरआन गया

ना'त-गोई का मैं ममनून-ए-करम हूँ, ए'जाज़ !ख़ुल्द में ले के मुझे ना'तिया-दीवान गया

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