नात लिरिक्स

Waqar-e-Deen-e-Mustafa Muawiya Muawiya

वक़ार-ए-दीन-ए-मुस्तफ़ा मुआविया मुआविया

नात ख़्वान: मीलाद रज़ा अत्तारीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

मु'आविया ! मु'आविया ! मु'आविया ! मु'आविया !

हर सहाबी-ए-नबी ! जन्नती जन्नती !और मु'आविया भी ! जन्नती जन्नती !

वक़ार-ए-दीन-ए-मुस्तफ़ा, मु'आविया मु'आवियाहम अहल-ए-हक़ के पेशवा, मु'आविया मु'आविया

सहाबी-ए-रसूल है, तू बाग़-ए-हक़ का फूल हैहै क्या बुलंद मर्तबा, मु'आविया मु'आविया

उठेगा जब तू हश्र में, तो होगी रब के फ़ज़्ल सेबदन पे नूर की रिदा, मु'आविया मु'आविया

किताब का, हिसाब का मु'आविया को 'इल्म देनबी ने की थी ये दु'आ, मु'आविया मु'आविया

मु'आविया को प्यार है नबी के अहल-ए-बैत सेमुहिब्ब-ए-आल-ए-मुर्तज़ा, मु'आविया मु'आविया

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