नात लिरिक्स

Aye Rahat-e-Jaan Jo Tere Qadmon Se Laga Ho

ऐ राहत-ए-जाँ जो तेरे क़दमों से लगा हो

नात ख़्वान: मीलाद रज़ा अत्तारीशायर: मौलाना हसन रज़ा ख़ान बरेलवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ऐ राहत-ए-जाँ ! जो तेरे क़दमों से लगा होक्यूँ ख़ाक-बसर सूरत-ए-नक़्श-ए-कफ़-ए-पा हो

ऐसा न कोई है, न कोई हो, न हुआ होसाया भी तो इक मिस्ल है, फिर क्यूँ न जुदा हो

अल्लाह का महबूब बने जो तुम्हें चाहेउस का तो बयाँ ही नहीं कुछ तुम जिसे चाहो

दिल सब से उठा कर जो पड़ा हो तेरे दर परउफ़्ताद-ए-दो-'आलम से त'अल्लुक़ उसे क्या हो

उस हाथ से दिल सोख़्ता-जानों के हरे करजिस से रुतब-ए-सोख़्ता की नश्व-नुमा हो

हर साँस से निकले गुल-ए-फ़िरदौस की ख़ुश्बूगर 'अक्स-फ़िगन दिल में वो नक़्श-ए-कफ़-ए-पा हो

उस दर की तरफ़ इस लिए मीज़ाब का मुँह हैवो क़िब्ला-ए-कौनैन है, ये क़िब्ला-नुमा हो

बेचैन रखे मुझ को तेरा दर्द-ए-मोहब्बतमिट जाए वो दिल फिर जिसे अरमान-ए-दवा हो

ये मेरी समझ में कभी आ ही नहीं सकताईमान मुझे फेरने को तू ने दिया हो

उस घर से 'अयाँ नूर-ए-इलाही हो हमेशातुम जिस में घड़ी भर के लिए जल्वा-नुमा हो

मक़बूल हैं अब्रू के इशारे से दु'आएँकब तीर कमानदार-ए-नुबुव्वत का ख़ता हो

हो सिलसिला उल्फ़त का जिसे ज़ुल्फ़-ए-नबी सेउलझे न कोई काम, न पाबंद-ए-बला हो

शुक्र एक करम का भी अदा हो नहीं सकतादिल उन पे फ़िदा, जान-ए-हसन उन पे फ़िदा हो

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